रविवार, 29 सितंबर 2013

लम्बी जुदाई सिर्फ गाना नहीं है

लड़के के मुताबीक
लम्बी जुदाई दर्दभरा अहसास है
सिर्फ गाना नहीं है
लम्बी जुदाई एक बिना मुहर लगा पासपोर्ट है
दूसरी दुनिया के उस देश का
जहाँ कोई खाप पंचायत नहीं है
कोई तालिबान नहीं है
लड़के को यकीन है
की एक दिन वो ढूंढ लेगा लड़की को
अपनी जिन्दगींनुमा फिल्म के आखिरी सीन में
क्या हुआ जो वो एक स्लमडॉग मिलियानायर नहीं है
लड़का इक्कीसवीं सदी का है
उसके पास अंतरजाल है
जिसके इस्तेमाल से वो पहुँच सकता है
अपनी प्रेमिका के पास
इसलिए वो भटकता है
अंतरजाल नामक ब्रह्माण्ड में
फेसबुक ट्विटर ऑरकुट जीमेल इत्यादि ग्रहों पर
ढूंढ चूका है वो
पर नहीं मिला है उसे लड़की का पता
लड़की के पास स्मार्टफोन नहीं है
कोई गैजेट नहीं है
लड़की के पास फेसबुक नहीं है
बस एक प्यारा सा मासूम चेहरा है
जिसपे लड़के ने कही थी हजारो किताब लिखने की बात
लड़की के पास एक कबूतर है
जिसे वो कबूतर जा जा कहके
छोड़ देती है आसमान में
इस ख्याल से की वो पहुंचा देगा लड़के के पास उसका सन्देश
पर ये इक्कीसवीं सदी है
और इक्कीसवी सदी ने इंकार कर दिया है
कबूतरों को डाकिया मान ने से
लड़की रोंती है
और गाती है लम्बी जुदाई वाला गाना
जिसको गाकर किया जा सकता है
चार दिन का इंतजार
लड़की फ़िल्में नहीं देखती
इसलिए उसे पता नहीं है आखिरी सीन के बारे में
Happy Ending के बारे में
उसे पता नहीं है की
चार दिन के जुदाई के बाद
आता है मिलन का दिन

अराहान

1 टिप्पणी:

HARSHVARDHAN ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति।। आभार आपका!!

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