शनिवार, 22 जून 2013

थोड़ी सी जगह दे दो अपनी बाहों में

थोड़ी सी जगह दे दो अपनी बाहों में
लिपट कर तुमसे रोना है मुझे

पा लिया है सबकुछ तुम्हे पाकर
अब अपना सब कुछ तुम पर खोना है मुझे

टूट गए थे जो सपने तुमसे जुदा होकर
तुम्हारे आँखों से उन सपनों को अब संजोना है मुझे

रो लेने दो मुझे तुमसे लिपट कर
आंसुओं से अपने जख्मों को धोना है मुझे

रूठ जाने दो सावन को मुझे उस से क्या लेना देना
अब तुम्हारे मोहब्बत की बारिश में खुद को भिगोना है मुझे

काट ली है हमने वो बेचैन रातें हिज्र की
तुम्हारे नैनों के समंदर में खुद को डुबोना है मुझे

थोड़ी सी जगह दे दो अपनी बाहों में
लिपट कर तुमसे रोना है मुझे

अराहान 

कोई टिप्पणी नहीं: