शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

क्षणिकाएं - 1

एक 

उस के   निकलती शराब की बू को
सूंघ लेते हैं लोग बड़ी दूर से
खोजी कुत्तो की तरह
पर उसके जलते दिल की तीखी गंध को
कोई महसूस नहीं कर पाता

दो 

ऊपर आग है
नीचे समंदर
बीच में है हम दोनों
थोड़े जलते हुए
थोड़े डूबते हुए

तीन 

हम दोनों ने उस समय प्यार किया
जब आस पास रोज बन रहे थे नए नए तालिबान
रोज एक कारतूस खरीदी जाती
हमारे सीने में उतारने के लिए
रोज एक नया फतवा जारी होता हमारे नाम
रोज एक शरियत नाजायज बताती हमरे इश्क को
पर हर रोज हम सांस लेते
मस्जिद में गूंजने वाले अजान की तरह

चार 

तुम्हारे इश्क में पड़ने का मामला
दुनिया ने इतना संगीन बनाया
की कभी  तुम्हे इजराइल
तो कभी मुझे फिलिस्तीन बनाया

पांच

समय के गर्भ में
गहराई तक धंसे हुए हैं
सुनहरे स्मृतियों के जर्जर अवशेष
जितना अन्दर जाता है वर्तमान का फावड़ा
यादों का एक हसीन टुकड़ा निकल आता है
जिसे मैं आंसुओं से धोकर
पोंछ देता हूँ  मुस्कराहट के  से रुमाल से
और रख लेता हूँ अपने जेब में वो टुकडा
आने वाले कई वर्षों तक रोने के लिए, मुस्कुराने के लिए

कोई टिप्पणी नहीं: