रविवार, 5 अगस्त 2012

मेहरुन्निसा क्या वो तुम हो

Photo Courtsey: Tumblr.com
मेहरुन्निसा क्या वो तुम हो
चाँद पर बैठी
चरखा कातती हुयी
मेहरुन्निसा क्या वो तुम्ही हो
जो लटका देती है ख्वाबों के रंग का एक पतला सूत
मेरे छत पर
और शायद इन्तजार करती हो मेरा
उसपर लटककर ऊपर आने का
अगर वो तुम्ही हो तो
भेजो कोई मोटी रस्सी
वो सूत का पतला धागा नहीं उठा सकता मेरा वजन
चौंको नहीं, मैं पहले की तरह ही दुबला पतला हूँ '
पर मेरा वजन बढ़ चुका है
मेरी दिल के कोठरियों में दबी उन अनकही बातो के भार से
जिन्हें मैं तुम्हे अक्सर बताने की कोशिश करता था पर बता ना सका
जिन्हें तुम सुन लेती तो,
 यूँ नजर ना आती चाँद पर चरखों से खामोशियों के धागे  कातते हुए
आसमान से नहीं टपकती तुम्हारे रोने की गीली आवाज
मेहरुन्निसा फ़ेंक दो जल्दी से कोई मोटी सी रस्सी
मैं ऊपर आकर तुम्हारे स्पर्श के गुरुत्वाकर्षण से
कम करना चाहता हूँ अपना वजन
बता देना चाहता हूँ वो सब
जिस से तुम अबतक अनजान हो
मेहरुन्निसा मैं तुमसे तबसे मोहब्बत करता हूँ
जब तुम एक कैटरपिलर हुआ करती थी
और मैं उलझा हुआ रहता था तुम्हारे रेशमी धागों में
तुम देखती थी हमेशा मुझे अपने मुस्कराहट की दूरबीन से
और मैं झेंपता था सुलझने की हर नाकामयाब कोशिश पर
मैं उलझा हे रहा उन रेशमी धागों में और
नजाने कब तुम तितली बन कर उड़ गयी
मुझे पता ना चला
तुम्हारे जाने के बाद मैं तुम्हे ढूँढता रहा
जब भी दिखाई देती कोई तितली
मैं पीछा करता उसका
और इसी कोशिश में  मैं कितनी बार गुमशुदा हो चुका हूँ
मुझे अब भी पता नहीं की कहाँ हूँ मैं
पर जहां भी हूँ मैं
वहाँ एक चाँद है
जिस पर तुम बैठी हो
चरखे से  सूत कातती हुयी
और शायद सुन रही हो मेरी बातें ध्यान से
मेहरूनिसा अगर तुम सुन चुकी हो सबकुछ
तो मेरी एक ख्वाहिश पूरी करना
मैं कल एक बेदाग़ चाँद देखना चाहता हूँ

अराहान
4 Aug 2012








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