रविवार, 1 जुलाई 2012

ये जरूरी नहीं

ये जरूरी नहीं की हर इंसान करे एक शख्स से ही प्यार
ये भी मुमकिन है की हम एक बार में पड़ें,
एक से ज्यादा लोगों के प्यार में
बराबर करें प्यार अपनी सभी प्रेमिकाओं को
निभाएं उनके वादें
बिना किसी को रुलाये
बिना किसी को दुःख पहुंचाए
बाँटें सभी को अपना वक्त बराबर हिस्सों में
गलत नहीं है कुछ इसमें
अगर हम गौर करें इस बात पर
खुले दिमाग से, ईमानदार होकर
ऊँची कर लें अपनी सोच
और विश्लेषण करें इस बात का
परम्पराओं को ताक पर रखते हुए
हम पायेंगे की कुछ गलत नहीं है इसमें
कोई घटियापन नहीं है
कोई कुंठा नहीं है इसके पीछे
ये एक सच्चाई है जो इस बात से वास्ता रखती है की
"प्यार बांटने से बढता है"

ब्रजेश कुमार सिंह "अराहान"

३० जून २०१२


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