गुरुवार, 15 मई 2014

पर्स

तुम्हारा पर्स 
हाँ तुम्हारा पर्स चोरी हो चूका है 
जिसमे थे कुल ३०० रुपये
एक रेल टिकट:
उस शहर के लिए जहाँ जिन्दा है एक ही शख्स तुम्हारे इंतजार में 
एक बार  का बिल:
जहाँ की शराब अब तक तुम्हे मदहोस नहीं कर पाती 
घर के राशन का लिस्ट:
जिसमे पहले नंबर पे है भूख मारने  की दवा  
एक एटीएम कार्ड: 
जिसका पिन भूल चुके हो तुम 
किसी के घर का पता
जो लिखा है किसी अजीब लिपि में  
एक दवाई  की पर्ची
जिसमे दर्ज थे उन दवाओ के नाम, जिनके इंतजार में एक बूढी औरत खड़ी होगी छत पर 
एक प्रेम पत्र 
जिसकी लिखावट से पता चलता होगा  की कांपे होंगे लिखने वाले के हाथ 
और एक लड़की की तस्वीर 
जिसे देखकर कोई ये नहीं कह सकता की लड़की कभी रोती भी होगी 

बड़े बेवकूफ इंसान हो तुम  
अपनी पूरी दुनिया लेकर घूमते हो पर्स में 
और देखते भी नहीं की इस दुनिया के हर दीवाल, हर बैनर, हर होर्डिंग पर लिखा है 
"चोरो और जेबकतरों से सावधान" 

बुधवार, 14 मई 2014

नाश्ता

 

तुम बड़ी देर से करती हो नाश्ता
हमेशा की तरह
मुझे दरवाजे तक छोड़ के आने के बाद ही,
रखती हो अपने प्लेट में
दो बासी रोटी और एक आचार

मैं रोज की तरह
कुछ देर रुक कर
खिड़की से
चुपके से देखता हूँ मैं तुम्हे
मुस्कुराते हुए
सुखी रोटी को निवाला बनाते हुए 

रोज की तरह मैं नाश्ते के बाद हर रोज खाता हूँ एक कसम
की अगले दिन तुम्हारे प्लेट में नहीं होगी कोई बासी रोटी

लेकिन मैं निगल नहीं पाता हूँ वो एक छोटी सी कसम
एक उलटी में उगल देता हूँ
शायद मुझे पता नहीं
की एक बासी रोटी पचाई जा सकती है
पर एक झूठी कसम नहीं
अरहान

अश्लील कहानी

अश्लील कहानी 


कहानी के उस हिस्से में 
लड़की उतार देती है अपना सबकुछ 
सिवाए अपने कपड़ो के 
अपनी इच्छा 
अपने सपने
अपना आज 
अपना कल 
अपनी आत्मा 
अपनी जिंदगी
परत दर परत खोल देती है वो सबकुछ
सौंप देती है उस
कलमकार को
जिसकी इस कहानी को अश्लील समझकर
ख़ारिज कर देते है संपादक प्रकाशित करने से


अराहान 

मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

तुमसे प्यार करना और वफ़ा की उम्मीद रखना

तुमसे प्यार करना 
और वफ़ा की उम्मीद रखना 
ठीक वैसा ही है जैसे 
पानी की सतह पर लिख देना एक कविता 
और उम्मीद करना 
की मछलियाँ इस गाकर सुनाएंगी 

तुमसे प्यार करना 
और वफ़ा की उम्मीद रखना 
ठीक वैसा ही है जैसे 
आस्तीन में पालना एक सांप
और उम्मीद करना की वो डसेगा नहीं

तुमसे प्यार करना
और वफ़ा की उम्मीद रखना
ठीक वैसा ही है जैसे
एक बोतल में बंद कर एक प्रेम पत्र
फेंक देना समंदर में
और उम्मीद करना की वो तुम्हे मिल जायेंगे

तुमसे प्यार करना
और वफ़ा की उम्मीद रखना
ठीक वैसा ही है जैसे
रेत पर लिख देना ज़िन्दगी
और उम्मीद करना की जिंदगी मिटेगी नहीं

तुमसे प्यार करना
और वफ़ा की उम्मीद रखना
ठीक वैसा है जैसे
पी लेना गिलास भर जहर
और उम्मीद करना की प्यास बुझ जाएगी

तुमसे प्यार करना
और वफ़ा की उम्मीद रखना
ठीक वैसा ही है जैसे
कागज़ की नाव पर समंदर में उतरना
और उम्मीद करना की किनारा मिल जायेगा 

सोमवार, 21 अप्रैल 2014

उम्मीद

बहुत दूर, 
गहराई में उतर के देखो 
एक ख्वाबगाह है 
जहां उम्मीदों के Ghetto में 
ज़िंदा है मेरी मोहब्बत 
Below Poverty Line के नीचे 
अपनी खुरदुरी उँगलियों से 
Forbes मैगजीन के पन्ने पलटते 
तुम्हारे जिंदगी की कंपनी में 
सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन ने के सपने देखते हुए 

अराहान

बुधवार, 16 अप्रैल 2014

बचा खुचा सामान

बस बचा खुचा हमारे पास एक 
आसमान है 
जिसको रोज रात देखकर ये तसल्ली कर लेते हैं की 
वो वहीँ आसमान है जो तुम्हारे ऊपर है 
मुट्ठियों में भर लेते है हर रात 
तुम्हारे शहर से आने वाली हवा 
वो हवा, जो उतरने से मना कर देती है मेरे फेफड़ों में 
तुम्हारी तरह ये कहते हुए की 
"मुझे सिगरेट की गंध से नफरत है" 

कुछ बासी उखड़ी बेढब सी कवितायेँ हैं
जिनमे तुमको तुमसे चुराकर रक्खा है हमने
शाम किसी छत पर बैठकर खुदको सुनाने के लिए

अलमारियों के बीच, कहीं किसी कोने में
जिन्दा है एक ओल्ड मोंक की बोतल
जिसको तय करना है मेरे हलक से एक रास्ता
आंसू बन ने के लिए

हथेलियों में बाकी है
अभी मेरे किस्मत की बागी केंचुलियाँ
जिनके टुकड़े ढूँढ ढूंढ कर शायद तुम्हारी किस्मत
मिल जाये मुझसे

बस बचा खुचा इतना ही हैं मेरे पास
और हाँ तुम्हारी दी हुई एक डायरी भी
जिसमे दर्ज है मेरी बर्बादी का अफसाना

अराहान

तुम नहीं समझोगी,

तुम नहीं समझोगी,
कितना कठिन होता है
आँखों में शराब भर के
कभी ना रोने की कसम खाना
पलकों के पांव भारी हो जाते हैं
ख्वाबों के छूने भर से
सोचो कितना कठिन होता होगा
एक आने वाले कल को गड्ढे में गिराना
तिलिस्म बुनती रहती है घडी
बीते लम्हों के धागों से
बहुत मुश्किल होता है
वक्त से पीछे चले जाना
तुम नहीं समझोगी
कितना कठिन होता है
स्याह रातो के कैनवास पर
जुगनुओं को मारकर तस्वीरें बनाना
एक पल के लिए तो रौशन हो जाता है घर मेरा
मोमबत्तियों के रोने से
सोचो कितना कठिन होता होगा
लोगो को उम्र भर के लिए रुलाना
जिंदगी बन के दौड़ती है रगों में बेबसी
तुम नहीं समझोगी
कितना कठिन होता है
यूँ ही बागी बन जाना
अराहान